
अजीत मिश्रा (खोजी)
🚨खाकी पर ‘खौफ’ और ‘वसूली’ का दाग: संतकबीरनगर में रक्षक ही बने भक्षक!🚨
🔥यूपी पुलिस की ‘मित्रता’: पहले लात-घूंसों से तोड़ा शरीर, फिर कट्टा-गांजा का डर दिखाकर लूटा।
🔥’जीरो टॉलरेंस’ को ठेंगा: सरकारी गाड़ी बनी वसूली का अड्डा, सिपाहियों पर गंभीर आरोप।
🔥चुनावी रंजिश और जातिसूचक गालियां: दलित युवक की रूह कपा देने वाली आपबीती।
🔥साहब! गरीब हूँ, छोड़ दो… रहम की भीख मांगता रहा सुधाकर, वर्दीधारी जेब भरते रहे।
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश
संतकबीरनगर। उत्तर प्रदेश पुलिस का स्लोगन है— ‘मित्र पुलिस’। लेकिन संतकबीरनगर के दुधारा थाना क्षेत्र से जो कहानी सामने आई है, वह ‘मित्रता’ नहीं बल्कि ‘दरिंदगी’ और ‘डकैती’ की बू दे रही है। एक तरफ सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ जीरो टॉलरेंस की नीति का ढिंढोरा पीट रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके मातहत सिपाही बीच सड़क से युवाओं को अगवा कर ‘वसूली का धंधा’ चला रहे हैं।
💫आधी रात का ‘अपहरण’ और बर्बरता
पीड़ित सुधाकर कुमार (निवासी: छपिया छितौना) के साथ बीती 27 मार्च की रात जो हुआ, वह किसी फिल्मी विलेन की करतूत से कम नहीं है। आरोप है कि जब सुधाकर कांटे से घर लौट रहा था, तभी कुर्खिया पेट्रोल पंप के पास वर्दीधारी भेड़ियों ने उसे दबोच लिया। चुनावी रंजिश की आड़ में सिपाही संजय प्रसाद, हरिप्रकाश और उनके साथियों ने सरकारी गाड़ी को ही ‘यातना गृह’ बना डाला।
💫जातिसूचक गालियां और ‘प्लांट’ करने की धमकी
हैरानी की बात यह है कि रक्षकों ने न केवल लात-घूंसों और डंडों से सुधाकर के शरीर को तोड़ा, बल्कि उसकी आत्मा पर भी प्रहार किया। पीड़ित का आरोप है कि उसे जातिसूचक गालियां दी गईं और धमकी दी गई कि— “चुपचाप पैसे दे, वरना गांजा और कट्टा लगाकर ऐसी जेल भेजेंगे कि जिंदगी वहीं सड़ जाएगी।”
“सड़क पर गुंडे तमंचा सटाकर लूटते हैं, लेकिन यहाँ तो वर्दी वालों ने कानून का खौफ दिखाकर 10 हजार रुपये की ‘डकैती’ डाली है।” — स्थानीय ग्रामीण
💫10 हजार में बिका ‘कानून’
गरीबी और मौत के डर के बीच सुधाकर ने गिड़गिड़ाते हुए रहम की भीख मांगी, लेकिन खाकी का दिल नहीं पसीजा। आरोप है कि सिपाहियों ने उसकी जान की कीमत 10,000 रुपये लगाई। मजबूरन दोस्त से कर्ज लेकर पुलिसकर्मियों की जेब गरम की गई, तब जाकर सुधाकर को उस नरक से रिहाई मिली।
💫सवाल जो जवाब मांगते हैं:
👉क्या अब यूपी में पुलिसकर्मियों को ‘वसूली’ का लाइसेंस मिल गया है?
👉सरकारी गाड़ी में किसी नागरिक को बंधक बनाकर पीटना कौन सी नियमावली में है?
👉अगर पुलिस ही झूठे मुकदमों (कट्टा-गांजा) में फंसाने की धमकी देगी, तो जनता किसके पास जाएगी?
अब गेंद पुलिस अधीक्षक (SP) संतकबीरनगर के पाले में है। पीड़ित ने न्याय की गुहार लगाई है। क्या इन आरोपी सिपाहियों पर ‘बुलडोजर’ जैसी सख्त कार्रवाई होगी या जांच के नाम पर मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा? बस्ती मंडल की जनता की नजरें अब इस मामले पर टिकी हैं।






















